Saturday, March 18, 2023

लाड़ली तुम प्राणन सो प्यारी !!

लाड़ली तुम प्राणन सो प्यारी !!
किशोरी .. तुम ही जान हमारी !!
ओर शरण न ओर सहारा , तुम ही ठोर हमारी!!
 ऐक आसरो गहो दासी ने , श्रीराधा नाम दिवानी!!
बिन तुम्हरे कछु सूझत नाहीं,, किन्ही तुम संग यारी !! 
जैसो तैसो ,बिको हाथ तेरे , राख़ो अपना जानी !! 
ना निरखो मेरे दोष किशोरी ,, हों अवगुण की खानी !!
अहो लड़ेती आए मिलो अब ,, करी करुणा ब्रजरानी!!
बृजभूमि मे राखो छिपाई,, सघन कुँज की छाइँ!!

Monday, December 5, 2022

राधा राधा रटत है वृन्दावन की ओट । सत्य घटना बृजभाव

राधा राधा रटत है आक ढाक और केर
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वृंदावन में यमुना जी के तीरे एक व्यक्ति बैठे थे ! विचार मग्न थे ! दिन में नाम की महिमा का बखान सुन कर आ रहे थे ! सोच रहे थे क्या सत्य में नाम में इतनी शक्ति होती है ? (अविश्वास वो सबसे पहला भाव है जो मन में आता है ऐसी कथा सुन कर!)

बैठे बैठे निद्रा छा गई ! 
अर्ध रात्रि के आस पास चारों ओर शांति थी ! कोई चहल पहल नहीं ! कर्ण पुटी में आवाज आने लगी "राधा कृष्ण राधा कृष्ण राधा कृष्ण राधा कृष्ण राधा कृष्ण राधा कृष्ण ।।।।।,," 

निरंतर जप चल रहा था ! व्यक्ति चारों ओर देखने लगे सोच कर कोई संत आस पास भजन कर रहे है ! वहां कोई नहीं था ! 
उठे थोड़ा इधर उधर देखने को ! कोई नही था ! रात भर कौतुकी मन अनुसंधान में लगा रहा किंतु कोई मिला नही ! प्रातः काल सूर्योदय से पहले कुछ संत स्नान को आने लगे ! एक संत ने उत्सुक सज्जन को देखा और मुस्कुराते हुए बोले "क्या बात है बेटा इतने परेशान क्यों हो ? क्या खो गया तुम्हारा ?"

सज्जन बोले बाबा रात भर से परेशान हूं लगातार राधा कृष्ण सुन रहा हूं किंतु ये आवाज कहां से आ रही है पता नही चल रहा !"

बाबा बोले "बेटा बृंदाबन नाम सिद्ध संतों से अटी है ! बृंदाबन की भूमि स्वयं नाम जप करती है ! इसमें भला क्या अचरज ! कान लगा धरती पर और सुन !"

जैसे ही व्यक्ति ने धरती पे शीश रखा और कान ने बृन्दाबन की रज को स्पर्श किया तो वो नाम जप जोर से और स्पष्ट रूप से सुनाई देने लगा ! 

संत ने बताया यहां एक महान वैष्णव संत ने समाधि ली थी जो निरंतर जप में लीन रहते थे ! बाबा तो नित्य निकुंज सेवा में चले गए किंतु उनकी देह आज भी पिछले ७० से ८० सालों से नाम जप में ही लीन है ! ये कोई आश्चर्य नहीं ! 

चलो माँ को प्रणाम कर स्नान कर लो फिर भोग आरती के बाद प्रसाद पा कर जाना ! 

यह सत्य है । कोई भी इसको आज भी महसूस कर सकता है 

वृन्दावनबिहारीलाल की जय!!!
जय जय श्री राधे!!!
✍️श्रीजी मंजरीदास (बृजभाव )
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Saturday, May 21, 2022

सत्य कथा बृज भाव

*🙏मेरे ठाकुरजी*🙏

*वडोदरा के पास एक गांव, गांव में कृष्ण भगवान के परम भक्त ऐसे मनसुख मास्टरजी स्कूल में बच्चों को बहुत अच्छे से पढ़ाते*
 *अच्छी शिक्षा के साथ साथ बच्चों में अच्छे संस्कार देते ।*
 *प्रभु का हर पल चिंतन करते रहते ।*

*मनसुख मास्टरजी हर पूनम को डाकोर ठाकुरजी के दर्शन के लिए जाते । स्कूल में उन्होंने बच्चों को इतना होशियार बना दिया था कि जिस दिन मास्टरजी ठाकुरजी के दर्शन के लिए जाते उस दिन कोई एक बच्चा स्कूल के सभी विद्यार्थियों को बहुत अच्छी तरह से पढाता ।*

 *इस प्रकार अच्छी तरह से स्कूल की नौकरी और ठाकुर जी की भक्ति से मनसुख मास्टरजी का जीवन चल रहा था ।*

*गांव के कुछ ईर्ष्यालु लोगों ने वडोदरा के शिक्षणाधिकारी से मनसुख मास्टरजी की शिकायत की कि हमारे गांव के मास्टरजी बच्चों को पढ़ाने के बदले डाकोरजी ठाकुर दर्शन के लिए चले जाते हैं जिससे बच्चों की पढ़ाई खराब होती है ।*

*दो बार जांच करने के लिए शिक्षणाधिकारी की आफिस से कुछ साहब आए पर उस दिन पूनम न होने के कारण मनसुख मास्टरजी स्कूल में हाजिर थे और स्कूल की प्रार्थना और बच्चों की पढ़ाई और संस्कार देखकर जांच अधिकारी बहुत खुश हुए और ईनाम के रूप में पगार बढ़ाते गये ।*

*गांव के लोगों को जब इस बात का पता चला तो सभी ने निश्चय किया फिर से शिकायत की जाय इस बार स्पष्ट शब्दों में पूनम के दिन जांच की जाए ऐसा लिखा गया जिससे मास्टरजी हाथों-हाथ पकड़े जाय और इस बार शिक्षणाधिकारी स्वयं जांच के लिए आए इस पर जोर दिया गया ।*

*पूनम के दिन सुबह की पहली ट्रेन में मास्टरजी डाकोरजी ठाकुर दर्शन के लिए निकले गये ।*
 *दूसरी ओर ठीक 11 बजे स्कूल में जांच के लिए शिक्षणाधिकारी साहब गांव में आए । गांव के लोगों ने शिक्षणाधिकारी साहब का स्वागत किया ।*
 *मास्टरजी की पत्नी को जब इस बात का पता चला गांव में जांच के लिए साहब आएं हैं और मास्टरजी ठाकुर दर्शन के लिए गए हैं । तुरंत वह दौड़ती दौड़ती घर में गयी ठाकुर जी की मूर्ति के समक्ष घी का दीपक जलाया और और ठाकुर जी से कहने लगी 🙏हे रणछोड़ राय मेरे पति की नौकरी चली जाए उसकी मुझे कोई चिंता नहीं पर कल सुबह जब यह बात सभी को पता चलेगी तो आप पर कौन भरोसा करेगा ।*
 *🙏हे ठाकुरजी हमारी लाज रखना । दूसरे ही क्षण डाकोर के ठाकुरजी की मूर्ति में से साक्षात ठाकुरजी अपने भक्त की लाज रखने के लिए मनसुख मास्टरजी का रूप धारण कर गांव के स्कूल में बच्चों को पढ़ाने लग गये ।* *🙏जैसे ही गांव के लोग और शिक्षणाधिकारी जांच करने के लिए आए उन्होंने देखा मास्टरजी आंखें बंद करके कृष्ण की प्रार्थना गा रहे हैं और बच्चे उतनी ही सुंदरता से उनके पीछे पीछे गा रहे हैं ।*
 *🙏प्रार्थना पूरी होने के बाद मास्टरजी के रूप में आए भगवान ने कहा - साहब मुझे पहले खबर कर दी होती तो आप सभी के स्वागत की अच्छे से तैयारी करता ।* *शिक्षणाधिकारी ने बच्चों से प्रश्न पूछे होशियार बच्चों ने सभी प्रश्नों का विस्तार से अच्छे जवाब दिए । बच्चों की शिक्षा और संस्कार देखकर शिक्षणाधिकारी साहब बहुत खुश हुए ।*
 *शिक्षणाधिकारी साहब ने इनाम के रूप में पगार में बढ़ोतरी और एक इन्क्रीमेंट देने की घोषणा की । गांव के लोग अंदर ही अंदर जल कर राख हो गये ।*

*🙏सही घटना तो अब घटती है, शिक्षणाधिकारी खुश होकर वडोदरा जाने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचते हैं अचानक सामने से डाकोर जी से ठाकुरजी का दर्शन करके मनसुख मास्टरजी ट्रेन से उतरे, मनसुख मास्टरजी को देख शिक्षणाधिकारी चोंक गये ?* 

*मास्टरजी भी शिक्षणाधिकारी को देखकर घबरा गये, घबराते हुए कहने लगे साहब मुझे अगर पता होता कि आज आप आने वाले हैं तो मैं डाकोर जी ठाकुरजी के दर्शन के लिए नहीं जाता ।*

*शिक्षणाधिकारी साहब ने कहा मनसुखजी आप मजाक कर रहे हैं ? मैं आपके स्कूल में जांच करने गया आप खुद पूरे दिन हमारे साथ रहे ? ये सब क्या है ? मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है ?*

*🙏मनसुख मास्टरजी की आंखें भर आईं और रोते रोते कहने लगे साहब मैं समझ गया, 🙏मेरे भगवान ने मेरी लाज रखने के लिए, मेरी नौकरी बचाने के लिए मेरे डाकोर जी के ठाकुरजी कृष्ण भगवान को मास्टरजी बनकर नौकरी करनी पड़ी, वाह मेरे ठाकुरजी, भक्तों के लिए आप कितने रूप धारण करके उनका काम करते हैं ।* *शिक्षणाधिकारी और गांव के लोगों ने जब सारी वास्तविकता सुनी सभी की आंखों से आंसू निकल पड़े ।* *मनसुख मास्टरजी ने तुरन्त एक कागज निकाला और उस पर अपना राजीनामा लिखकर शिक्षणाधिकारी को देते हुए बोले मेरे बदले मेरे ठाकुरजी को नौकरी करनी पड़े ऐसी नौकरी मुझे नहीं करनी है ।*
*शिक्षणाधिकारी साहब ने और गांव के लोगों ने बहुत समझाया, गांव के लोग अपनी भूल पर पछताने लगे मास्टरजी से माफी मांगने लगे ।*
*मास्टरजी स्कूल में गये जिस कुर्सी पर मुरलीधर भगवान श्री कृष्ण मेरे ठाकुरजी बैठे थे उसकी चार परिक्रमा कर उसे प्रणाम कर चौंधार आंसुओं से रोने लगे, 🙏🙏हे मेरे नाथ अखिल ब्रह्माण्ड के मालिक आज आपको मेरे जैसे तुच्छ मानव के कारण मास्टर का रूप धारण कर नौकरी करनी पड़ी।* 
*🙏हे प्रभु आज़ आपने यह साबित कर दिया कि आप अपने भक्तों के लिए किसी भी हद तक जा सकते हो*
 *🙏वाह मेरे ठाकुरजी वाह*🙏

*🙏जय श्री कृष्ण की जय*🙏

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चेतावनी जीवन

चेतावनी
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.
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नर भूल ना जाना दीवाने......... आखिर
एक नहीं घडी होगी
दो काठ के घोड़ों की बग्गी....तेरे द्वारे
आन खड़ी होगी...
सदमा होगा घर कुनबे को...आंसुओ
की बही झड़ी होगी
शमशान की किस्मत जागेगी.........
.रौनक दो चार घडी होगी...
.
.
ये दौलत जो तूने कमाई है....ये दौलत
यही पड़ी होगी..
उस धरमराज के द्वार
परीक्षा ....तेरी बहुत कड़ी होगी...
इसीलिए......... ............... .
भजेजा राधे राधे ...जपेजा राधे राधे
श्री वृन्दावन धाम अपार....भजेजा राधे
राध

Monday, May 16, 2022

एक ऐसा मंदिर जिसे इंसानों ने नही बल्कि भूत प्रेतों ने बनाया है ?

एक ऐसा मंदिर जिसे इंसानों ने नहीं बल्कि भूतों ने बनाया था? 
भगवान शिव का प्राचीन मंदिर । मुस्लिम शासकों ने इसे तोड़ने के लिए गोले तक दागे, लेकिन ग्वालियर चंबल अंचल के बीहड़ों में बना सिहोनिया का ककनमठ मंदिर आज भी लटकते हुए पत्थरों से बना हुआ है । चंबल के बीहड़ में बना ये मंदिर 10 किलोमीटर दूर से ही दिखाई देता है. जैसे-जैसे इस मंदिर के नजदीक जाते हैं इसका एक एक पत्थर लटकते हुए भी दिखाई देने लगता है. जितना नजदीक जाएंगे मन में उतनी ही दहशत लगने लगती है. लेकिन किसी की मजाल है, जो इसके लटकते हुए पत्थरों को भी हिला सके. आस-पास बने कई छोटे-छोटे मंदिर नष्ट हो गए हैं, लेकिन इस मंदिर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. मंदिर के बारे में कमाल की बात तो यह है कि जिन पत्थरों से यह मंदिर बना है, आस-पास के इलाके में ये पत्थर नहीं मिलता है. इस मंदिर को लेकर कई तरह की किवदंतियां हैं. पूरे अंचल में एक किवदंती सबसे ज्यादा मशहूर है कि मंदिर का निर्माण भूतों ने किया था. लेकिन मंदिर में एक प्राचीन शिवलिंग विराजमान है,
 जिसके पीछे यह तर्क दिया जाता है कि भगवान शिव का एक नाम भूतनाथ भी है. भोलेनाथ ना सिर्फ देवी-देवताओं और इंसानों के भगवान हैं बल्कि उनको भूत-प्रेत व दानव भी भगवान मानकर पूजते हैं. पुराणों में लिखा है कि भगवान शिव की शादी में देवी-देवताओं के अलावा भूत-प्रेत भी बाराती बनकर आए थे और इस मंदिर का निर्माण भी भूतों ने किया है. कहा जाता है कि रात में यहां वो नजारा दिखता है, जिसे देखकर किसी भी इंसान की रूह कांप जाएगी. ककनमठ मंदिर का इतिहास करीब एक हज़ार साल हजार पुराना है. बेजोड़ स्थापत्य कला का उदाहरण ये मंदिर पत्थरों को एक दूसरे से सटा कर बनाया गया है. मंदिर का संतुलन पत्थरों पर इस तरह बना है कि बड़े-बड़े तूफान और आंधी भी इसे हिला नहीं पाई. कुछ लोग यह मानते हैं कि कोई चमत्कारिक अदृश्य शक्ति है जो मंदिर की रक्षा करती है. इस मंदिर के बीचो बीच शिव लिंग स्थापित है. 120 फीट ऊंचे इस मंदिर का उपरी सिरा और गर्भ गृह सैकड़ों साल बाद भी सुरक्षित है. इस मंदिर को देखने में लगता है कि यह कभी भी गिर सकता है.. लेकिन ककनमठ मंदिर सैकडों सालों से इसी तरह टिका हुआ है यह एक अदभुत करिश्मा है. इसकी एक औऱ ये विशेषता है..कि इस मंदिर के आस पास के सभी मंदिर टूट गए हैं , 
लेकिन ककनमठ मंदिर आज भी सुरक्षित है. मुरैना में स्थित ककनमठ मंदिर पर्यटकों के लिए विशेष स्थल है. यहां की कला और मंदिर की बड़ी-बड़ी शिलाओं को देख कर पर्यटक भी इस मंदिर की तारीफ करने से खुद को नहीं रोक पाते. मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं की प्रतिमायें पर्यटकों को खजुराहो की याद दिलाती हैं. मगर प्रशासन की उपेक्षा के चलते पर्यटक यदा-कदा यहां आ तो जाते हैं.

Tuesday, April 12, 2022

बुझी मोमबत्ती कथा मार्मिक

1️⃣2️⃣❗0️⃣4️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣2️⃣
*(((बुझी मोमबत्ती* )))

एक पिता अपनी चार वर्षीय बेटी मिनी से बहुत प्रेम करता था। ऑफिस से लौटते वक़्त वह रोज़ उसके लिए तरह-तरह के खिलौने और खाने-पीने की चीजें लाता था। बेटी भी अपने पिता से बहुत लगाव रखती थी और हमेशा अपनी तोतली आवाज़ में पापा-पापा कह कर पुकारा करती थी।

दिन अच्छे बीत रहे थे की अचानक एक दिन मिनी को बहुत तेज बुखार हुआ, सभी घबरा गए , वे दौड़े भागे डॉक्टर के पास गए , पर वहां ले जाते-ले जाते मिनी की मृत्यु हो गयी।

परिवार पे तो मानो पहाड़ ही टूट पड़ा और पिता की हालत तो मृत व्यक्ति के समान हो गयी। मिनी के जाने के हफ़्तों बाद भी वे ना किसी से बोलते ना बात करते…बस रोते ही रहते। यहाँ तक की उन्होंने ऑफिस जाना भी छोड़ दिया और घर से निकलना भी बंद कर दिया।

आस-पड़ोस के लोगों और नाते-रिश्तेदारों ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की पर वे किसी की ना सुनते , उनके मुख से बस एक ही शब्द निकलता … मिनी !

एक दिन ऐसे ही मिनी के बारे में सोचते-सोचते उनकी आँख लग गयी और उन्हें एक स्वप्न आया।

उन्होंने देखा कि स्वर्ग में सैकड़ों बच्चियां परी बन कर घूम रही हैं, सभी सफ़ेद पोशाकें पहने हुए हैं और हाथ में मोमबत्ती ले कर चल रही हैं। तभी उन्हें मिनी भी दिखाई दी।

उसे देखते ही पिता बोले , ” मिनी , मेरी प्यारी बच्ची , सभी परियों की मोमबत्तियां जल रही हैं, पर तुम्हारी बुझी क्यों हैं , तुम इसे जला क्यों नहीं लेती ?”

मिनी बोली, ” पापा, मैं तो बार-बार मोमबत्ती जलाती हूँ , पर आप इतना रोते हो कि आपके आंसुओं से मेरी मोमबत्ती बुझ जाती है….”

ये सुनते ही पिता की नींद टूट गयी। उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया , वे समझ गए की उनके इस तरह दुखी रहने से उनकी बेटी भी खुश नहीं रह सकती , और वह पुनः सामान्य जीवन की तरफ बढ़ने लगे।

मित्रों, किसी करीबी के जाने का ग़म शब्दों से बयान नहीं किया जा सकता। पर कहीं ना कहीं हमें अपने आप को मजबूत करना होता है और अपनी जिम्मेदारियों को निभाना होता है। और शायद ऐसा करना ही मरने वाले की आत्मा को शांति देता है। *इसमें कोई संदेह नहीं कि जो हमसे प्रेम करते हैं वे हमे खुश ही देखना चाहते हैं , अपने जाने के बाद भी..!!*
   *🙏🏼🙏🏿🙏🏽जय जय श्री राधे*🙏🏻🙏🙏🏾

Saturday, April 2, 2022

प्रेम गीता भाग 3

कृष्ण प्रेमगीता
(भाग ३ )

कृष्ण अपनी राधा की दिव्यता का वर्णन कर रहे है..... अस्तित्व खुद अपना परिचय करा रहे है.... रानियां ध्यान से सुन तो रही है पर कुछ कुछ समझ नही पा रही है.... मनुष्य जन्म लेने पर देवता भी अपना अस्तित्व भूल जाते है .... ये रानियां भी भूल चुकी है.... की परब्रम्ह की पत्नियां बनने का सौभाग्य ऐसे ही थोड़ी मिला है इनको.... पर अब तो ये साधारण पत्नियां ही है.... एक रानी ने बीच में टोकते हुए कहा ," नाथ क्षमा करे पर सरल भाषा में बताने की कृपा करे... ये ब्रह्म और ये आल्हादिनी ये सब नहीं समझ पा रही है... यहां तो आपकी और राधा की बात हो रही है ना...!" 
कृष्ण मुस्कुराए और बोले अच्छा ठीक है.... ब्रह्म कोन है?? ब्रह्म यानी,  मैं कृष्ण हूं... कृष्ण क्या है ?? कृष्ण है प्रेम तत्व .... और प्रेम का स्वरूप है राधा....
इसका सरल भाव यही है की ब्रह्म कृष्ण रूपी शरीर है तो इस शरीर को चलाने वाली आत्मा प्राण शक्ति है राधा.... और सिर्फ कृष्ण को ही नही हर प्राणी मात्र मेरा ही अंश है और उनमें जो प्रेम का भाव है तो उनमें भी है राधा....

जो कृष्ण से प्रेम करे उस हृदय में है राधा .... राधा के अस्तित्व के बिना प्रेम नही और जहा प्रेम ना हो वहा कृष्ण केसे मिले.... मेरे सारे भक्त , प्रेमी, मेरे परिकर जो मुझसे अनंत प्रेम करते है ये श्री राधा की ही कृपा है.... राधा के बिना कृष्ण से प्रेम संभव ही नहीं.... 
कृष्ण को पाने का सरल मार्ग है श्री राधा... जिनके हृदय में राधा हो उनको मैं हृदय में स्थान देता हूं.... 
राधा कृष्ण की पहचान है... राधा से ही कृष्ण का अस्तित्व है... राधा ने ही कृष्ण के हृदय में प्रेम तत्व की ज्योती जलाकर कृष्ण को कृष्ण से मिलाया है.... द्वारिकाधीशने अपनी आंखे बंद कर ली अश्रु बहने लगे थे बंद आंखों से... आत्माराम अपनी आत्ममे कुछ क्षण लीन हो गए थे.... सारी रानियां उनकी और देख रही थी मानो उनकी भी आज समाधि लग गई थी... रूक्मिणी के भी अश्रु बह चले थे...भाव से भर गई थी...

(शेष भाग कल)

 ✍️श्रीजी मंजरीदास  )

braj ras divas 3

आज  के  विचार ( प्रीत  की यह कैसी नई रीत है.....) !! बृज रस- भाग 3 !! ************************* प्रेम सीधी चाल चलता कहाँ हैं ! ....प्रेम की ...